रघुराम राजन बोले- GST अच्छा, लेकिन जुगाड़ के सहारे बनता है देश में काम
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि भारत में लागू गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) सही दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है लेकिन इसके लागू करने में हुई दिक्कतों से साफ है कि भारत में जुगाड़ से काम बनाया जाता है. जीएसटी की तारीफ करते हुए राजन ने तंज किया कि भारत में कोई भी काम बिना जुगाड़ के पूरा नहीं होता.
इंडिया टुडे को दावोस में दिए इंटरव्यू के दौरान राजन ने कहा कि बीते पांच साल के दौरान देश को तेज रफ्तार विकास मिली है और यह रफ्तार बीते 20 साल की आर्थिक दिशा का नतीजा है. जीएसटी के मुद्दे पर राजन ने कहा कि देश में खामियों के साथ जीएसटी को लागू किया गया लेकिन यह हमारी आदत में शुमार है कि किसी भी चीज को जुगाड़ के सहारे आगे बढ़ाने का काम किया जाता है.
इसी तर्ज पर देश में एक और आर्थिक सुधार बैंकरप्सी कोड पर राजन ने कहा कि यह कानून भी मोदी सरकार की आर्थिक दिशा में अहम उपलब्धि है. इस सुधार में भी खामियों को दूर करने का काम किया जा रहा है और उम्मीद है कि इसका फायदा अर्थव्यवस्था को मिलेगा.
राजन ने दावा किया कि देश में कारोबारी कर्ज देने के काम को जीएसटी से बड़ी मदद मिलेगी. जहां पहले छोटे और मझोले कारोबारी को कर्ज देने के काम में राजनीतिक हस्तक्षेप की समस्या रहती थी अब जीएसटी के जरिए मिलने वाले सेल्स आंकड़े के आधार पर सही कर्ज दिए जा सकेंगे. इसके चलते बैंकों को अपने एनपीए में सुधार लाने में मदद मिलेगी.
गौरतलब है कि रघुराम राजन का केन्द्रीय रिजर्व बैंक के गवर्नर का कार्यकाल यूपीए सरकार में शुरू हुआ था और एनडीए की मोदी सरकार के कार्यकाल में खत्म हुआ था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंदी की सटीक भविष्यवाणी कर सुर्खियों में आए रघुराम राजन को मोदी सरकार ने दूसरे कार्यकाल का प्रस्ताव नहीं दिया जिसके बाद वह भारत छोड़ अमेरिका जाने के लिए मजबूर हो गए.
रिवरफ्रंट के निर्माण के लिए 747.49 करोड़ का बजट था. बताया जाता है कि बाद में मुख्य सचिव की बैठक में निर्माणकार्य के लिए 1990.24 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया गया था. जुलाई, 2016 में 1513.51 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे. निर्माणकार्य में स्वीकृत राशि से 1437.83करोड़ रुपये खर्च हुए थे, लेकिन करीब 60 फीसदी काम ही पूरा हो सका था.
वहीं मामले की शिकायत के मुताबिक, सपा सरकार के दौरान गोमती नदी के किनारे को विकसित करने की योजना शुरु की गई थी, जिसमें 1513 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. इस खर्चे में गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं, लेकिन तत्कालीन सपा सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की.
योगी सरकार के प्रदेश की सत्ता में आने के बाद इस घोटाले में जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद इसमें जांच शुरू हुई थी. 19 जून 2017 को पुलिस ने भी इस मामले में केस दर्ज किया था. बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी. ईडी इस मामले में जांच कर रही है और आज कई अधिकारियों समेत इंजीनीयरों के ठिकानों पर छापे मारे जा रहे हैं.
इंडिया टुडे को दावोस में दिए इंटरव्यू के दौरान राजन ने कहा कि बीते पांच साल के दौरान देश को तेज रफ्तार विकास मिली है और यह रफ्तार बीते 20 साल की आर्थिक दिशा का नतीजा है. जीएसटी के मुद्दे पर राजन ने कहा कि देश में खामियों के साथ जीएसटी को लागू किया गया लेकिन यह हमारी आदत में शुमार है कि किसी भी चीज को जुगाड़ के सहारे आगे बढ़ाने का काम किया जाता है.
इसी तर्ज पर देश में एक और आर्थिक सुधार बैंकरप्सी कोड पर राजन ने कहा कि यह कानून भी मोदी सरकार की आर्थिक दिशा में अहम उपलब्धि है. इस सुधार में भी खामियों को दूर करने का काम किया जा रहा है और उम्मीद है कि इसका फायदा अर्थव्यवस्था को मिलेगा.
राजन ने दावा किया कि देश में कारोबारी कर्ज देने के काम को जीएसटी से बड़ी मदद मिलेगी. जहां पहले छोटे और मझोले कारोबारी को कर्ज देने के काम में राजनीतिक हस्तक्षेप की समस्या रहती थी अब जीएसटी के जरिए मिलने वाले सेल्स आंकड़े के आधार पर सही कर्ज दिए जा सकेंगे. इसके चलते बैंकों को अपने एनपीए में सुधार लाने में मदद मिलेगी.
गौरतलब है कि रघुराम राजन का केन्द्रीय रिजर्व बैंक के गवर्नर का कार्यकाल यूपीए सरकार में शुरू हुआ था और एनडीए की मोदी सरकार के कार्यकाल में खत्म हुआ था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंदी की सटीक भविष्यवाणी कर सुर्खियों में आए रघुराम राजन को मोदी सरकार ने दूसरे कार्यकाल का प्रस्ताव नहीं दिया जिसके बाद वह भारत छोड़ अमेरिका जाने के लिए मजबूर हो गए.
रिवरफ्रंट के निर्माण के लिए 747.49 करोड़ का बजट था. बताया जाता है कि बाद में मुख्य सचिव की बैठक में निर्माणकार्य के लिए 1990.24 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया गया था. जुलाई, 2016 में 1513.51 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे. निर्माणकार्य में स्वीकृत राशि से 1437.83करोड़ रुपये खर्च हुए थे, लेकिन करीब 60 फीसदी काम ही पूरा हो सका था.
वहीं मामले की शिकायत के मुताबिक, सपा सरकार के दौरान गोमती नदी के किनारे को विकसित करने की योजना शुरु की गई थी, जिसमें 1513 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. इस खर्चे में गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं, लेकिन तत्कालीन सपा सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की.
योगी सरकार के प्रदेश की सत्ता में आने के बाद इस घोटाले में जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद इसमें जांच शुरू हुई थी. 19 जून 2017 को पुलिस ने भी इस मामले में केस दर्ज किया था. बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी. ईडी इस मामले में जांच कर रही है और आज कई अधिकारियों समेत इंजीनीयरों के ठिकानों पर छापे मारे जा रहे हैं.
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