अमेरिकी अटार्नी जनरल ने कहा- ट्रम्प के चुनाव अभियान में नहीं था रूसी दखल
वॉशिंगटन. अमेरिका के अटार्नी जनरल विलियम बर ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के चुनाव में रूसी दखल के प्रमाण नहीं मिले हैं। विशेष अधिवक्ता रॉबर्ट मुलर की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए बर ने कहा कि ट्रम्प ने अपराध नहीं किया। हालांकि,रिपोर्ट उन्हें पूरी तरह से दोषमुक्त भी नहीं कर रही है। साक्ष्य दोनों तरफ इशारा कर रहे हैं।
ट्रम्प ने कहा- शर्मनाक है कि आपके राष्ट्रपति को यह सब झेलना पड़ा
मुलर की रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद ट्रम्प ने फ्लोरिडा में मीडिया से कहा कि यह सबसे शर्मनाक घटना थी। उनका कहना था कि शर्मनाक है कि आपके देश और राष्ट्रपति को यह सब झेलना पड़ा। एक लंबी जांच और कई लोगों को परेशान करने के बाद केवल यह घोषणा कर दी गई कि चुनाव में रूस का दखल नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक पूर्ण रिहाई है।
अमेरिका के विशेष अधिवक्ता रॉबर्ट मुलर ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूस के दखल दिए जाने के मामले की गोपनीय जांच पूरी करके एक दिन पहले अटॉर्नी जनरल विलियम बर को सौंप दी थी। मुलर करीब दो साल से अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस के दखल मामले की जांच कर रहे थे।
एफबीआई के पूर्व निदेशक मुलर ने 22 माह की जांच के दौरान तीन कंपनियों और 34 व्यक्तियों पर आपराधिक आरोप लगाए थे। इनमें से सात पर आरोप तय किए और एक को दोषी ठहराया। मुलर ने ट्रम्प से भी सवाल किए थे, जिनका उन्होंने लिखित में जवाब दिया था। राष्ट्रपति चुनावों में ट्रम्प पर रूस से मिलीभगत कर चुनाव नतीजों को प्रभावित करने का आरोप लगा था।
ट्रम्प पर पिछले दो सालों से खतरा मंडरा रहा था
जांच की वजह से ट्रम्प पर पिछले दो सालों से खतरा मंडरा रहा था। डेमोक्रेट सांसद लगातार कह रहे थे कि रूसी साजिश के चलते ही 2016 के चुनाव में ट्रम्प को जीत मिली थी। डेमोक्रेट्स मुलर की जांच रिपोर्ट के आधार पर संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी भी कर रहे थे। 2020 के चुनाव की रणनीति भी मुलर की रिपोर्ट के आधार पर तय की जा रही थी।
कांग्रेस को भेजे गए चार पेज के पत्र में बर ने कहा कि कुछ रूसी लोगों ने ट्रम्प को चुनाव के दौरान मदद की पेशकश की थी, लेकिन जांच के दौरान कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे चुनाव में रूसी साजिश पर मुहर लगती हो।
बर ने संसद को बताया कि मुलर की जांच रिपोर्ट किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसमें कई सवालों के जवाब नहीं दिए जा सके हैं। उनका कहना है कि यह एक कठिन मसला है कि ट्रम्प के एक्शन और इरादे को न्याय प्रक्रिया में बाधा माना जाए या नहीं। हालांकि, उनका कहना है कि न्याय विभाग मान रहा है कि इस बात को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
ट्रम्प के मैनेजर ब्रेड प्रेस्कले ने कहा कि मुलर ने अपनी जांच के दौरान 28 सौ लोगों को समन भेजे और पांच सौ सर्च वारंट जारी किए। पांच सौ लोगों को गवाही के लिए बुलाया गया तो जांच पूरी करने के लिए एफबीआई के 40 एजेंटों के साथ 19 वकीलों की सेवाएं ली गईं। करोड़ों रुपये भी जांच पर खर्च हुए हैं। प्रेस्कले का कहना है कि डेमोक्रेट्स की वजह से यह सब परेशानी झेलनी पड़ी है।
ट्रम्प ने कहा- शर्मनाक है कि आपके राष्ट्रपति को यह सब झेलना पड़ा
मुलर की रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद ट्रम्प ने फ्लोरिडा में मीडिया से कहा कि यह सबसे शर्मनाक घटना थी। उनका कहना था कि शर्मनाक है कि आपके देश और राष्ट्रपति को यह सब झेलना पड़ा। एक लंबी जांच और कई लोगों को परेशान करने के बाद केवल यह घोषणा कर दी गई कि चुनाव में रूस का दखल नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक पूर्ण रिहाई है।
अमेरिका के विशेष अधिवक्ता रॉबर्ट मुलर ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूस के दखल दिए जाने के मामले की गोपनीय जांच पूरी करके एक दिन पहले अटॉर्नी जनरल विलियम बर को सौंप दी थी। मुलर करीब दो साल से अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस के दखल मामले की जांच कर रहे थे।
एफबीआई के पूर्व निदेशक मुलर ने 22 माह की जांच के दौरान तीन कंपनियों और 34 व्यक्तियों पर आपराधिक आरोप लगाए थे। इनमें से सात पर आरोप तय किए और एक को दोषी ठहराया। मुलर ने ट्रम्प से भी सवाल किए थे, जिनका उन्होंने लिखित में जवाब दिया था। राष्ट्रपति चुनावों में ट्रम्प पर रूस से मिलीभगत कर चुनाव नतीजों को प्रभावित करने का आरोप लगा था।
ट्रम्प पर पिछले दो सालों से खतरा मंडरा रहा था
जांच की वजह से ट्रम्प पर पिछले दो सालों से खतरा मंडरा रहा था। डेमोक्रेट सांसद लगातार कह रहे थे कि रूसी साजिश के चलते ही 2016 के चुनाव में ट्रम्प को जीत मिली थी। डेमोक्रेट्स मुलर की जांच रिपोर्ट के आधार पर संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी भी कर रहे थे। 2020 के चुनाव की रणनीति भी मुलर की रिपोर्ट के आधार पर तय की जा रही थी।
कांग्रेस को भेजे गए चार पेज के पत्र में बर ने कहा कि कुछ रूसी लोगों ने ट्रम्प को चुनाव के दौरान मदद की पेशकश की थी, लेकिन जांच के दौरान कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे चुनाव में रूसी साजिश पर मुहर लगती हो।
बर ने संसद को बताया कि मुलर की जांच रिपोर्ट किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसमें कई सवालों के जवाब नहीं दिए जा सके हैं। उनका कहना है कि यह एक कठिन मसला है कि ट्रम्प के एक्शन और इरादे को न्याय प्रक्रिया में बाधा माना जाए या नहीं। हालांकि, उनका कहना है कि न्याय विभाग मान रहा है कि इस बात को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
ट्रम्प के मैनेजर ब्रेड प्रेस्कले ने कहा कि मुलर ने अपनी जांच के दौरान 28 सौ लोगों को समन भेजे और पांच सौ सर्च वारंट जारी किए। पांच सौ लोगों को गवाही के लिए बुलाया गया तो जांच पूरी करने के लिए एफबीआई के 40 एजेंटों के साथ 19 वकीलों की सेवाएं ली गईं। करोड़ों रुपये भी जांच पर खर्च हुए हैं। प्रेस्कले का कहना है कि डेमोक्रेट्स की वजह से यह सब परेशानी झेलनी पड़ी है।
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