बोरूसिया डॉर्टमंड के मैच में पहुंचते हैं सबसे ज्यादा दर्शक, स्पेन में रियाल मैड्रिड से आगे बार्सिलोना

खेल डेस्क. जर्मनी के फुटबॉल क्लब बोरुसिया डॉर्टमंड के मैच में सबसे ज्यादा दर्शक स्टेडियम में पहुंचते हैं। फुटबॉल क्लबों पर 'द सीआइईएस फुटबॉल ऑब्जर्वेटरी' ने एक अध्ययन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच सालों में बोरुसिया के मैच में औसतन 80,230 दर्शक स्टेडियम में पहुंचते हैं। स्पैनिश लीग 'ला लिगा' में बार्सिलोना शीर्ष पर है। उसके मैच में 74,876 दर्शक पहुंचते हैं। वहीं, 69,822 दर्शक संख्या के साथ रियाल मैड्रिड दूसरे स्थान पर है।

इस लिस्ट में टॉप-10 में सबसे ज्यादा जर्मनी के पांच क्लब हैं। वहीं, स्पेन और इंग्लैंड के दो क्लब हैं। अमेरिका के अटलांटा यूनाइटेड को 10वां स्थान मिला। इंग्लैंड के क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड के मैच मेंं औसतन 75,218 दर्शक पहुंचते हैं।

जर्मनी के क्लबों ने टिकट की कीमतों को कम रखा
जर्मनी के क्लब के मैचों में ज्यादा दर्शकों के पहुंचने का सबसे बड़ा कारण वहां टिकटों की कीमतों में कमी का होना है। टिकट की कीमतों के लिए जर्मनी में क्लबों की प्रशंसा की जाती है, इसलिए टॉप-10 में वहां के पांच क्लब हैं।

दर्शकों के मामले में जर्मनी की बुंदेसलीगा टॉप पर
क्लबों के समर्थन के साथ-साथ दर्शकों के मामले में टॉप लीग जर्मनी की बुंदेसलीगा ही है। लीग के एक मैच में औसतन 43, 302 दर्शक पहुंचते हैं। इस मामले में इंग्लैंड की प्रीमियर लीग दूसरे स्थान और स्पेन की ला लिगा तीसरे स्थान पर है।

खेल डेस्क. विराट कोहली क्रिकेट वर्ल्ड कप के लिए ऑलराउंडर विजय शंकर के चुने जाने से खुश हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि विजय शंकर ने टीम को बहुत कुछ दिया है। वे टीम के लिए फायदेमंद रहेंगे। पिछले दिनों घोषित हुई 15 सदस्यीय टीम में अंबाती रायडू की जगह विजय शंकर को तरजीह दी गई थी। कोहली ने कहा, 'पिछले दो साल में विदेशी दौरे पर टीम इंडिया ने अच्छा प्रदर्शन किया है। 2018 में हमने दक्षिण अफ्रीका में वनडे सीरीज जीती। पिछले साल हुए एशिया कप में भारत ने पाकिस्तान को दो बार हराया और खिताब भी जीता।

टीम ने इस साल ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में खेली गई वनडे सीरीज भी जीती।' न्यूजीलैंड में शंकर ने अच्छा प्रदर्शन किया था। वनडे के नंबर-1 बल्लेबाज कोहली ने कहा कि महेंद्र सिंह धोनी टीम के सबसे सीनियर खिलाड़ी हैं। वे गेम को समझते हैं। निर्णय लेते समय मैं धोनी और रोहित से सलाह लेता हूं। टूर्नामेंट के लिए चुनी गई टीम बेहद संतुलित है। उन्होंने कहा कि आईपीएल से सभी खिलाड़ी लय हासिल कर चुके हैं। यह हमारे लिए फायदेमंद है।खेल डेस्क. इंग्लैंड में 30 मई से होने वाले वर्ल्ड कप के लिए सोमवार को 15 सदस्यीय भारतीय क्रिकेट टीम चुनी गई। भारतीय टीम 1975 से वर्ल्ड कप खेल रही है, लेकिन यह पहला मौका है जब चयनकर्ताओं ने 4 ऑलराउंडर चुने हैं। इससे पहले 2003 और 2011 के वर्ल्ड कप के लिए चुनी गई टीम में 3-3 ऑलराउंडर चुने गए थे। उसके अलावा कभी भी 2 से ज्यादा ऑलराउंडर नहीं चुने गए।


चयनकर्ताओं का 4 ऑलराउंडर चुनने का मकसद शायद गेंदबाजी और बल्लेबाजी विकल्प बढ़ाने का होगा। पिछले साल इंग्लैंड में वनडे सीरीज के दौरान भारत को टीम में ऑलराउंडर नहीं होने की कमी बहुत खली थी। तीन मैच की सीरीज में इंग्लैंड ने भारत को 2-1 से हराया था। आखिरी दो मैच में टीम इंडिया 5-5 गेंदबाजों के साथ खेली, लेकिन उसे दोनों में ही हार का सामना करना पड़ा।

2003 और 2011 की टीम में 3-3 ऑलराउंडर थे
1975 में हुए वर्ल्ड कप के लिए चुनी गई टीम इंडिया में एक भी ऑलराउंडर नहीं था। 1979 के वर्ल्ड कप में कपिल देव को ऑलराउंडर के तौर पर चुना गया था। इंग्लैंड में 1983 में हुए वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में कपिल देव के अलावा सुनील वासन भी ऑलराउंडर के तौर पर चुने गए थे। टीम इंडिया तब चैम्पियन बनी थी।

1987 के वर्ल्ड कप में भारतीय चयनकर्ताओं ने कपिल देव को ही ऑलराउंडर के तौर पर चुना। अगला विश्व कप 5 साल बाद 1992 में हुआ। तब की भारतीय टीम में भी कपिल देव ही इकलौते ऑलराउंडर थे। भारतीय उपमहाद्वीप में 1996 में हुए वर्ल्ड कप के लिए चुनी गई टीम इंडिया में एक भी ऑलराउंडर नहीं था।

1999 की वर्ल्ड कप की भारतीय टीम में भी रॉबिन सिंह के तौर पर एक ही ऑलराउंडर थे। हालांकि, 2003 में दक्षिण अफ्रीका में हुए वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया ने 3 ऑलराउंडर चुने थे। तब सौरव गांगुली की अगुआई में टीम इंडिया ने फाइनल तक का सफर तय किया था। हालांकि फाइनल में उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार झेलनी पड़ी थी।

2007 के वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में इरफान पठान के तौर पर सिर्फ एक ऑलराउंडर चुना गया। तब टीम इंडिया ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ पाई थी। 2011 वर्ल्ड कप के लिए चुनी गई टीम इंडिया में 3 ऑलराउंडर थे और भारत खिताब जीतने में सफल रहा। 2015 में टीम इंडिया में रविंद्र जडेजा और स्टुअर्ट बिन्नी के तौर पर 2 ही ऑलराउंडर थे। भारतीय टीम को तब सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के हाथों हार झेलनी पड़ी थी।

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